• 02 Apr, 2026

सफला एकादशी व्रत 2025: तिथि, महत्व, नियम, विधि, पूजा मंत्र, कथा और लाभ

सफला एकादशी मार्गशीर्ष (पौष कृष्ण पक्ष) की एक अत्यंत पुण्यदायी एकादशी है। यह व्रत विशेष रूप से असफलताओं को सफलता में बदलने, पापों के नाश और जीवन में शुभ फल प्राप्ति के लिए किया जाता है। भगवान श्रीहरि विष्णु की कृपा से यह एकादशी साधक के जीवन में स्थिरता, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती है।


 


सफला एकादशी 2025 तिथि व पारण समय

  • एकादशी तिथि प्रारम्भ: 14 दिसंबर 2025 (सायंकाल)
  • एकादशी व्रत दिन: 15 दिसंबर 2025
  • पारण (व्रत खोलने का समय): द्वादशी को सूर्योदय के बाद (स्थानीय पंचांग अनुसार)

नोट: पारण का समय स्थानानुसार बदल सकता है, अतः अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार पारण करें।


सफला एकादशी का महत्व

धर्मग्रंथों के अनुसार सफला एकादशी का व्रत करने से:

  • जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं
  • अधूरे कार्य पूर्ण होते हैं
  • पूर्व जन्मों के पापों का नाश होता है
  • आर्थिक, पारिवारिक और मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है
  • अंततः वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है

यह एकादशी विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है जो लंबे समय से संघर्ष, असफलता या निराशा से जूझ रहे हों।


सफला एकादशी व्रत के नियम (नियमावली)

व्रत से एक दिन पूर्व (दशमी)

  • सात्विक भोजन करें
  • तामसिक पदार्थ (मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज) का त्याग करें
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें

एकादशी के दिन

  • प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • भगवान विष्णु का ध्यान करें
  • उपवास रखें (निर्जल/फलाहार/एकभुक्त – सामर्थ्य अनुसार)
  • झूठ, क्रोध, निंदा और अपशब्दों से बचें
  • रात्रि में जागरण व हरिनाम संकीर्तन करें

द्वादशी (पारण)

  • ब्राह्मण या गरीब को भोजन/दान देकर पारण करें
  • तुलसी दल सहित भगवान विष्णु को भोग अर्पित करें

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सफला एकादशी पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान कर पूजा स्थान को शुद्ध करें
  2. चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति/चित्र स्थापित करें
  3. दीप प्रज्वलित करें और गंगाजल से शुद्धि करें
  4. तुलसी दल, पुष्प, फल, धूप-दीप अर्पित करें
  5. नीचे दिए गए मंत्रों से भगवान विष्णु की पूजा करें
  6. सफला एकादशी व्रत कथा का श्रवण/पाठ करें
  7. अंत में आरती कर क्षमा प्रार्थना करें

सफला एकादशी पूजा मंत्र

विष्णु मूल मंत्र

 
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥
 
 

विष्णु सहस्रनाम (संक्षिप्त जप)

 
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ॥
 
 

एकादशी व्रत मंत्र

 
एकादश्यां निराहारो विष्णुं यो भजते नरः ।
सर्वपापविनिर्मुक्तः स विष्णुलोकमाप्नुयात् ॥
 
 

तुलसी अर्पण मंत्र

 
नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे ।
नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिनी ॥
 
 

सफला एकादशी व्रत कथा (विस्तृत)

प्राचीन काल की बात है। चंपावती नामक एक समृद्ध और धर्मपरायण नगरी में राजा महिष्मत राज्य करते थे। राजा स्वयं विष्णुभक्त, दानशील और प्रजा-वत्सल थे, परंतु उनका पुत्र लुम्पक अत्यंत दुराचारी, अहंकारी और पापाचारी स्वभाव का था। वह जुआ, चोरी, व्यभिचार तथा ब्राह्मणों का अपमान करने जैसे घोर कर्मों में लिप्त रहता था।

राजा ने अनेक बार उसे समझाया, धर्म का मार्ग दिखाया, परंतु लुम्पक पर किसी उपदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। अंततः राज्य और धर्म की रक्षा के लिए विवश होकर राजा ने उसे राज्य से निष्कासित कर दिया। लुम्पक नगर से निकाल दिया गया और वह वन-वन भटकने लगा।

वन में रहते हुए वह चोरी और हिंसा के सहारे जीवन यापन करता था। एक दिन मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि आई, जिसे आज हम सफला एकादशी के नाम से जानते हैं। उसी दिन वह भूखा-प्यासा वन में भटकते हुए एक बेर (जुजुब वृक्ष) के नीचे पहुँचा। दुर्बलता के कारण वह वहीं गिर पड़ा और रात्रि भर भूख-प्यास से व्याकुल होकर वहीं जागता रहा।

उस दिन अनजाने में ही उसका निर्जल उपवास हो गया। रात्रि के समय ठंड से बचने के लिए वह वृक्ष के नीचे पड़े कुछ बेर उठाकर रख लेता है। प्रातःकाल जब सूर्य उदय हुआ, तब उसे अत्यधिक ग्लानि और पश्चाताप हुआ। उसने पहली बार अपने जीवन में भगवान विष्णु का स्मरण किया और उन्हीं बेरों को श्रद्धापूर्वक भगवान को अर्पित कर दिया।

भगवान विष्णु उसकी अनजानी भक्ति और एकादशी व्रत से अत्यंत प्रसन्न हुए। उसी क्षण उसके समस्त पाप नष्ट हो गए। आकाशवाणी हुई कि — “हे लुम्पक! आज तुमने अनजाने में ही सफला एकादशी का व्रत किया है। इसके प्रभाव से तुम्हारे सारे पाप नष्ट हुए। अब तुम पुनः राज्य प्राप्त करोगे और अंत में मोक्ष को प्राप्त होओगे।”

कुछ समय बाद राजा महिष्मत को दिव्य स्वप्न हुआ और उन्होंने लुम्पक को वापस बुलाकर राज्य सौंप दिया। धर्मपूर्वक राज्य करते हुए अंततः लुम्पक ने भगवान विष्णु के वैकुण्ठ धाम को प्राप्त किया। इस प्रकार यह एकादशी असफल को सफल बनाने वाली – सफला एकादशी कहलायी।


सफला एकादशी व्रत के लाभ

  • नौकरी व व्यवसाय में उन्नति
  • रुके हुए कार्यों में सफलता
  • मानसिक तनाव और नकारात्मकता से मुक्ति
  • धन, यश और कीर्ति की प्राप्ति
  • आध्यात्मिक शुद्धि और ईश्वर से निकटता

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या महिलाएँ सफला एकादशी का व्रत कर सकती हैं?

हाँ, यह व्रत पुरुष और महिलाएँ दोनों कर सकते हैं।

क्या फलाहार मान्य है?

हाँ, स्वास्थ्य अनुसार फलाहार या एकभुक्त कर सकते हैं।

क्या बिना व्रत कथा सुने फल मिलता है?

कथा श्रवण से फल कई गुना बढ़ जाता है, अतः अवश्य करें।


निष्कर्ष

सफला एकादशी व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला एक आध्यात्मिक साधन है। यदि आप अपने जीवन में बार-बार असफलताओं का सामना कर रहे हैं, तो श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत अवश्य ही सफलता का द्वार खोलता है

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Hari Krishna Regmi

Hari Krishna Regmi

I am a writer and researcher dedicated to collecting and sharing Hindu stotra, rituals, festivals, and cultural wisdom. My work focuses on preserving and presenting authentic knowledge in a simple, meaningful way.