शिष्योंको शिक्षा-दान और स्वयं शिक्षा-ग्रहण
शिष्योंको शिक्षा-दान और स्वयं शिक्षा-ग्रहण
शिष्योंको शिक्षा-दान और स्वयं शिक्षा-ग्रहण
सप्तम अध्याय में श्रीरामानुज की आध्यात्मिक यात्रा, गुरु भक्ति, वैष्णव परंपरा की श्रेष्ठता, और शरणागति के महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तृत वर्णन।
Read More“चतुर्थ अध्याय बन्धु-समागम में श्रीरामानुज का घर लौटना, माता-पुत्र मिलन, भगवान की कृपा और श्रीकाञ्चीपूर्ण के साथ दिव्य संगम का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।”
Read Moreइस अध्याय में श्रीरामानुज की विनम्रता, गोविन्द का शिव-भक्ति मार्ग, आलवंदार का दर्शन, राजकुमारी का भूत-निवारण और वेदान्त चर्चा के कारण रामानुज-यादवप्रकाश मतभेद का वर्णन मिलता है। यह अध्याय उनके आध्यात्मिक तेज और विशिष्टाद्वैत सिद्धान्त की भूमिका प्रस्तुत करता है।
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