विंशोत्तरी, अष्टोत्तरी तथा त्रिभागी सूर्यादि महादशा फल
वैदिक ज्योतिष में विंशोत्तरी, अष्टोत्तरी तथा त्रिभागी दशा का विशेष महत्व है। जन्मकाल में ग्रहों की महादशा के अनुसार मनुष्य के जीवन में सुख‑दुःख, उन्नति‑पतन, रोग‑आरोग्य, धन‑हानि आदि फलों का निर्धारण होता है। इस लेख में मूल संस्कृत श्लोक यथावत रखते हुए उनके हिंदी अर्थ सरल एवं स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किए गए हैं।
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सूर्यदशाफलम्
संस्कृत श्लोक
देशान्तरं व निजवन्धुवियोगदुःखम्, उद्वेगरोगभयचौरभया च पीडा ।
पूर्वस्थितस्य निखिलस्य धनस्य नाशो, भानोर्दशा जननकालदशा भवन्ति ॥१॥
हिंदी अर्थ
सूर्य की महादशा में देशान्तर (विदेश या दूर स्थान) में निवास, स्वजनों से वियोग का दुःख, मानसिक चिंता, रोग और भय, चोरों से कष्ट तथा पूर्व संचित धन का नाश होता है। यह फल जन्मकालीन सूर्यदशा में विशेष रूप से प्रकट होते हैं।
चन्द्रदशाफलम्
संस्कृत श्लोक
हेमादिभूतिवरवाहन यानलाभः, शत्रुप्रतापबलवृद्धि परंपरा च ।
इष्टानदान शयनासन भोजनानि, नूनं सदा शशिदशागमने भवन्ति ॥२॥
हिंदी अर्थ
चन्द्रमा की महादशा में स्वर्ण आदि ऐश्वर्य की प्राप्ति, श्रेष्ठ वाहन और पालकी आदि का लाभ, शत्रुओं पर विजय, बल और प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है। इच्छानुसार दान, उत्तम शयन, आसन तथा श्रेष्ठ भोजन का सुख प्राप्त होता है।
भौमदशाफलम् (मंगल)
संस्कृत श्लोक
भूपाल चौरभयवह्निकृता च पीडा, सर्वाङ्गरोग भय दुःख सुदुःखिता च ।
चिन्ताज्वरश्च बहुकष्टदरिद्रयुक्तः, स्यात्सर्वदा कुजदशा जनने जनानाम् ॥३॥
हिंदी अर्थ
मंगल की महादशा में राजभय, चोरभय, अग्नि से कष्ट, सम्पूर्ण शरीर में रोग का भय, अत्यधिक दुःख, चिंता, ज्वर, अनेक प्रकार के कष्ट तथा दरिद्रता का योग बनता है।
राहुदशाफलम्
संस्कृत श्लोक
दीनो नरो भवति बुद्धिविहीन चिन्ता, सर्वाङ्गरोग भय दुःख सदुःखिताच ।
पापानि बन्ध बहुकष्ट दरिद्रयुक्तं, राहोर्दशा जननकाल दशा भवन्ति ॥४॥
हिंदी अर्थ
राहु की महादशा में मनुष्य बुद्धिहीन, दीन और चिंताग्रस्त हो जाता है। शरीर में रोग, भय और अत्यधिक दुःख रहता है। पापकर्मों के कारण बंधन, भारी कष्ट तथा दरिद्रता प्राप्त होती है।
गुरुदशाफलम् (बृहस्पति)
संस्कृत श्लोक
राज्याधिकार परिवर्धित चित्तवृत्ति, धर्माधिकार परिपालन शुद्धबुद्धिम् ।
सद्विग्रहोऽपि धनधान्य समृद्धिताच, स्याद्देवता गुरुदशागमने भवन्ति ॥५॥
हिंदी अर्थ
गुरु की महादशा में राजकीय सम्मान और अधिकार, मानसिक संतोष, धर्म के प्रति रुचि, शुद्ध बुद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, सद्विचार तथा धन‑धान्य की समृद्धि प्राप्त होती है।
शनिदशाफलम्
संस्कृत श्लोक
मिथ्यापवादवधबन्धनमर्थहानि मित्रे च बन्धुवचनेषु च युद्धबुद्धिः ।
सिद्धंच कार्यमपि यत्र सदा विनष्टं, स्यात्सर्वदा शनिदशागमने भवन्ति ॥६॥
हिंदी अर्थ
शनि की महादशा में झूठे अपवाद, बंधन, धनहानि, मित्रों और बंधुओं से विवाद, बुद्धि का नाश तथा सिद्ध होते हुए कार्यों का भी विनाश हो जाता है।
बुधदशाफलम्
संस्कृत श्लोक
दिव्याङ्गना-मदनसङ्गम-केलिसौख्यं, नानाविधैः समभिरागमनोऽभिरामः ।
हेमादिरत्न विभवागम कोश धान्यं, स्यात्सर्वदा बुधदशागमने भवन्ति ॥७॥
हिंदी अर्थ
बुध की महादशा में सुंदर स्त्रियों के संग भोग‑विलास, प्रेम और मनोरंजन, स्वर्ण‑रत्न की प्राप्ति, वैभवयुक्त खजाना तथा धन‑धान्य की वृद्धि होती है।
केतुदशाफलम्
संस्कृत श्लोक
भार्यावियोगजनितं च शरीरखुःखं, द्रव्यस्य हानिरतिकष्ट परंपरा च ।
रोगश्च बन्धुकलहश्च विदेशता च, केतोर्दशा जननकालदशा भवन्ति ॥८॥
हिंदी अर्थ
केतु की महादशा में पत्नी से वियोग, शरीर में कष्ट, धन की हानि, निरंतर दुःख, बंधुओं से कलह तथा विदेश में निवास का योग बनता है।
शुक्रदशाफलम्
संस्कृत श्लोक
आरामवृद्धि परिसर्व शरीरवृद्धिम्, श्वेतातपत्र धनधान्य समाकुलञ्च ।
आयुःशरीर सुतपौत्रसुखं नराणां, द्रव्यञ्चभार्गवदशागमने भवन्ति ॥९॥
हिंदी अर्थ
शुक्र की महादशा में आराम, बाग‑बगीचे और सुख‑सुविधाओं की वृद्धि, शरीर की पुष्टि, मान‑सम्मान, धन‑धान्य की वृद्धि, दीर्घायु तथा पुत्र‑पौत्र का सुख और द्रव्य की प्राप्ति होती है।
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निष्कर्ष
विंशोत्तरी, अष्टोत्तरी और त्रिभागी महादशा का सही ज्ञान मनुष्य को अपने जीवन के शुभ‑अशुभ फलों को समझने में सहायता करता है। उचित उपायों के द्वारा नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।
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