• 31 Mar, 2026

वैकुण्ठ चन्द्रिका – वैष्णव कर्मकाण्ड ग्रंथ | मरणोत्तर संस्कारों का शास्त्रीय विधान

वैकुण्ठ चन्द्रिका एक प्रामाणिक वैष्णव कर्मकाण्ड ग्रंथ है, जिसमें वैष्णव व्यक्ति के देहावसान (मरण) के पश्चात किये जाने वाले सभी संस्कारों का विधिपूर्वक वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ श्रीवैष्णव परम्परा में विशेष आदर के साथ अध्ययन किया जाता है।


📘 वैकुण्ठ चन्द्रिका ग्रंथ का उद्देश्य

वैष्णव दर्शन के अनुसार मृत्यु देह का त्याग है, आत्मा का नहीं। वैकुण्ठ चन्द्रिका का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि वैष्णव जीव के मरणोत्तर कर्म किस प्रकार भगवान नारायण की शरणागति में सम्पन्न किये जाएँ।


🕉 वैष्णव के मरणोत्तर प्रमुख कर्मकाण्ड

इस ग्रंथ में वैष्णव व्यक्ति के देह त्याग के पश्चात निम्नलिखित संस्कारों का क्रमबद्ध विधान दिया गया है:

  • ब्रह्ममेध कर्म
  • दाह संस्कार (वैष्णव मंत्रों सहित)
  • दशगात्र विधि
  • एकादशाह कर्म
  • द्वादशाह विधि
  • त्रयोदशाह संस्कार
  • वैकुण्ठ उत्सव

📿 ब्रह्ममेध और दाह संस्कार का तात्त्विक अर्थ

ब्रह्ममेध द्वारा जीव को उसके ब्रह्मस्वरूप का स्मरण कराया जाता है। दाह संस्कार में देह पंचतत्त्व में विलीन होती है और आत्मा भगवान नारायण के पथ पर अग्रसर होती है।


🪔 दशगात्र से त्रयोदशाह तक का आध्यात्मिक भाव

दशगात्र से त्रयोदशाह तक किये जाने वाले कर्म जीव की सूक्ष्म यात्रा को सरल बनाते हैं। इन दिनों विष्णु नाम संकीर्तन, पिण्डदान और आचार्य स्मरण का विशेष महत्व है।

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🎉 वैकुण्ठ उत्सव – शोक नहीं, उत्सव

वैष्णव परम्परा में मृत्यु को वैकुण्ठ गमन माना जाता है। इस कारण वैकुण्ठ उत्सव में शोक नहीं, बल्कि विष्णु नाम संकीर्तन और भगवद् स्मरण किया जाता है।


📜 निष्कर्ष

वैकुण्ठ चन्द्रिका केवल कर्मकाण्ड ग्रंथ नहीं, बल्कि वैष्णव जीवन दर्शन का प्रतिबिम्ब है। जो लोग वैष्णव मरणोत्तर संस्कारों को शास्त्रीय रूप से समझना चाहते हैं, उनके लिए यह ग्रंथ अत्यंत उपयोगी है।

Hari Krishna Regmi

Hari Krishna Regmi

I am a writer and researcher dedicated to collecting and sharing Hindu stotra, rituals, festivals, and cultural wisdom. My work focuses on preserving and presenting authentic knowledge in a simple, meaningful way.