- 02 Apr, 2026

Hari Krishna Regmi
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दशम अध्याय – श्रीरामानुज का संन्यास | रामानुजाचार्य जीवनचरित
नवम अध्याय – मन्त्र-रहस्य-दीक्षा | श्रीरामानुज चरित्र कथा
सप्तम अध्याय – श्रीरामानुज की आध्यात्मिक दृढ़ता और गुरु-भक्ति
सप्तम अध्याय में श्रीरामानुज की आध्यात्मिक यात्रा, गुरु भक्ति, वैष्णव परंपरा की श्रेष्ठता, और शरणागति के महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तृत वर्णन।
Read Moreषष्ठ अध्याय – श्रीकांचीपूर्ण | रामानुज चरित्र
षष्ठ अध्याय श्रीकांचीपूर्ण – श्रीरामानुज और श्रीकांचीपूर्ण का दिव्य मिलन, भक्ति, ज्ञान, गुरु-शिष्य संबंध, और श्रीवरदराज की कृपा से जुड़ी एक प्रेरणादायक कथा।"
Read Moreपंचम अध्याय — ‘राजकुमारी’
इस अध्याय में श्रीरामानुज की विनम्रता, गोविन्द का शिव-भक्ति मार्ग, आलवंदार का दर्शन, राजकुमारी का भूत-निवारण और वेदान्त चर्चा के कारण रामानुज-यादवप्रकाश मतभेद का वर्णन मिलता है। यह अध्याय उनके आध्यात्मिक तेज और विशिष्टाद्वैत सिद्धान्त की भूमिका प्रस्तुत करता है।
Read Moreचतुर्थ अध्याय – बन्धु-समागम | श्रीरामानुज चरित्र कथा
“चतुर्थ अध्याय बन्धु-समागम में श्रीरामानुज का घर लौटना, माता-पुत्र मिलन, भगवान की कृपा और श्रीकाञ्चीपूर्ण के साथ दिव्य संगम का भावपूर्ण वर्णन मिलता है।”
Read Moreश्रीगणेश प्रातस्मरण स्तोत्रम् Ganesh Pratasmarana Stotra
श्रीगणेश प्रातःस्मरण स्तोत्र एक पवित्र प्रातःकालीन स्तोत्र है जिसका पाठ भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और मंगलकामना व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र प्रातःकाल स्मरण करने से बुद्धि की वृद्धि, कार्यों में सफलता, बाधाओं का नाश, तथा जीवन में शुभता का वास होता है।भगवान गणेश विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और विद्या-बुद्धि के दाता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ मन को शुद्ध करता है,
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